Tuesday, 24 April 2012

209. पहली मुलाक़ात में

घूंघट ना उठाया उसने पहली मुलाक़ात में,
गले से लगाया उसने सिली-सिली रात में.


जुबां को ना खोला उसने पहली मुलाक़ात में,
अपना बना लिया उसने बात-बात में.


जरा भी ना मुस्कराया उसने पहली मुलाक़ात में,
दिल खोल हँसाया उसने गुदगुदी करके गात में.


कुछ भी ना समझाया उसने पहली मुलाक़ात में,
आँसूं भी टपका दिए उसने मेरे जज्बात में.


नाम भी ना बताया उसने पहली मुलाक़ात में,
दिल निकाल के थमा दिया उसने मेरे हाथ में.


नज़र ना उठाई उसने पहली मुलाक़ात में,
इशारों में सुला लिया उसने अपने साथ में.








Tuesday, 31 January 2012

208. देश न अपने बचा लो भाई


जूता फेंक के विरोध जतावं   स  ,
फिर  लात -घुसे खावं स .

इनकी जम क हो स पिटाई ,
इनके के थाव स भाई .

मगर इनकी मेहनत बेकार ना जाव स ,
खबर इनकी जब मिडिया क थाव स .

लात -घुसा की हो ज्या स भरपाई ,
जब हो ज्या स इनके मन की चाही .

महंगाई की मार ये भी झेल रे सं .
माला की जगह एक जूते से  काम ले रे सं .

बड़ी बढ़िया स रीत इन न चलाई .
समझ स सब कोई भाई .

ना सारे मुंह लीप क आ रे सं ,
एक शीशी से काम डिगा रे सं .

सब का घमंड चूर हो ज्या स भाई ,
बूते स बाहर औकात जिसने भी दिखाई .

यो जनता  जनार्दन का फैसला स ,
भ्रष्टाचार  का बड़ा मसला स .

कौन इसने मेटगा भाई ,
किसे की समझ म ना स आई .

नेताओं  का विदेशा में पड़ा धन काला स ,
देश की जनता बिन निवाला स .

अन्ना न स इब जनता जगाई ,
इसका साथ जरुर दो भाई .

ध्यान त सुन लो यो के चाह व स ,
भ्रष्टाचार न दूर भगाव स .

अपने देश न इब बचा लो भाई ,
कदे फेर डूब ज्या भाई .

याद करो उनकी क़ुरबानी,
 कितना खून बहाया स .

कितना जोर लगा क ,
गोराँ को भगाया स .

उसी ए मुसीबत देश पर स आई ,
सारे मिल क दिख दो भाई .

देश न अपने बचा लो भाई ,
देश प्रेम की ज्योत जगा लो भाई ...